उसके साथ- ग़ज़ल


तेरे साथ जो भी देखे थे सपने, उसे जी रही हूँ उसके साथ। जो चाय अधूरी प्याली में छोड़ था गया, वो पी रही हूँ उसके साथ। मेरे सपनों को तू कभी समझ ही ना पाया, अब हर रोज़ नए ख़ाब सजा रही हूँ उसके साथ। कहता था, पूरी दुनिया घूमेंगे; दुनिया घुमाते घुमाते, मेरी…