उसके साथ- ग़ज़ल


तेरे साथ जो भी देखे थे सपने, उसे जी रही हूँ उसके साथ।

जो चाय अधूरी प्याली में छोड़ था गया, वो पी रही हूँ उसके साथ।

मेरे सपनों को तू कभी समझ ही ना पाया, अब हर रोज़ नए ख़ाब सजा रही हूँ उसके साथ।

कहता था, पूरी दुनिया घूमेंगे; दुनिया घुमाते घुमाते, मेरी दुनियाँ ही बदल दी थी तूने,

जो bookmark किया था map पर, अब हर महीने उन्ही जगहों पर घूमने जा रही हूँ उसके साथ।

जिस तरह का प्यार तुझसे था किया, उसी प्यार को शिद्दत से निभा रही हूँ उसके साथ।

साथ साल का जो ना चल पाया रिश्ता तेरा, साथ फेरों संग चलते जा रही हूँ उसके साथ।

बड़ी ही बेदर्दी से जिस रास्ते पर मुँह मोड़ था गया तू, उससी मोड़ पर एक घर बना रही हूँ उसके साथ।

आज सोचा एक ग़ज़ल के लिए याद तुझे करलु, वरना मिसरे कायी लिखतें जा रही हूँ मैं उसके साथ।

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Thankyou.

With love, Jyoti V❤️

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