तुमसे मिलके ऐसा लगा|


तुमसे मिलके ऐसा लगा,

मेरी कोई अधूरी कहानी तुम ही हो|

जब पहले बार तुमको गले लगाया,

पता चला मेरी बेखौफ जवानी तुम ही हो|

एक यार था मेरा जो कुछ साल पहले छोड़ गया मुझे,

कहता था तुम तोड़ी सादी-कोरी सी हो|

तुमने मेरा हाथ जब से है थमा,

लगा की मेरे कोरे कागज़ की स्याही तुम ही हो|

चलो मिलके एक कहानी लिखते है,

न मुकम्मल सी जो पहले रूमानी लगती थी|

पसंद न आये तोह अलग थलग करदेंगे,

वैसे भी तुमसे पहले कई बार मिटाकर ये मुहब्बत,

फिर से बनायीं लगती थी|

आज तेरी बाँहों में इस कदर कैद करले तू,

तेरा बंधन भी मुझको रिहाई लगे|

देख कर दुनिया समझ ही न पाए हमको,

जिस्म से दो और जान से एक लगे|

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